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4 अगस्त 2021 डॉक्टर उदित राज पूर्व सांसद एवं राष्ट्रिय प्रवक्ता कांग्रेस, मीनू वर्मा और संजय राज ने प्रेस की संवोधित करते हुए अफसोस व्यक्त किया कि 1 लाख लोगों को खोरी गांव के गरीब लोगों को कोविड महामारी , बरसात और आर्थिक बंदी में उजाड़ दिया सभ्य समाज देखता रहा। संयुक्त राष्ट्र तक मामला उठा लेकिन हरियाणा सरकार, दिल्ली सरकार और केंद्र की इनकी पीड़ा नही सुनाई पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने गरीबों के खिलाफ अपने फैसले पर अमल करा लिया जबकि हज़ारों ऐसे निर्णय हैँ जो लागू नही हो पाते। लोग अवमानना की याचिका दायर करते रहते हैं तब भी निर्णय नही लागू हो पाते। सुप्रीम कोर्ट भू और खान माफिया के खिलाफ कुछ न कर पाया । निर्णय में यह भी कह सकते थे कि जो भू माफिया इन गरीबों को जमीन बेचें उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जेल भेज जाए। उनसे पैसे वसूल करके वैकल्पिक स्थान पर बसाया जाए।

मीनू वर्मा ने आगे कहा कि पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट को हरियाणा सरकार ने संसोधन 2019 किया ताकि बसावट को हटाया न जाये। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है । अभी तक फैसला नही हुआ और ऐसी क्या आपातकाल थी कि उजाड़ने के लिए आतुर थे। क्या अमीरों के साथ ऐसा कभी हुआ?

संजय राज ने कहा कि दिल्ली की सीमा को अतिक्रमण फारेस्ट विभाग/ हरियाणा सरकार ने किया जिसके वजह से हज़ारों देल्हिके लोगों के घर उजड़ गए। दिल्ली सरकार अगर संवेदित होती तो इनके लिए लड़ सकती थी। उजड़े लोग आसमान के नीचे जानवर की ज़िंदगी गुजार रहे हैं । क्या सरकारें इनके खाने और रहने की व्यवस्था नही कर सकतीं?हम मांग करते हैं कि इनके खाने व बसाने का कार्य सरकारें फौरन करें।