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भारत का कोई भविष्य नहीं| - डॉ. उदित राज
24 May 2021

जब कोरोना वायरस फैला उसी समय से विज्ञान का तिरस्कार शुरू हो गया | दवा के रूप में गोमूत्र पार्टी का आयोजन किया गया| गोबर लेप के बाद स्नान करने से इलाज ढूढ़ा गया| विज्ञान बेचारा दूर से देखता रहा है कि कैसे वायरस का गला दबाए। अंत मे सफल हुआ और सबको शरण मे जाना पड़ा| अन्धविश्वासी समाज इस महामारी में भी तर्क संगत होता नहीं दिख रहा है| हमारे जीवन में ही ढोंग, पाखण्ड और धर्मान्धता है| लोग महंगे मकान और किचन तोड़ने में लगे रहते हैं कि वास्तु के अनुसार नही बना|

हरिद्वार कुम्भ में मुख्यमंत्री का जब बयान ऐसा हो कि गंगा मैया के आशीर्वाद से कोरोना नहीं होगा तो लोग क्यों न प्रोत्साहित हों? पानी से भी कोरोना फैलता है , जो नहाए उन्हें तो हुआ बल्कि पूरे देश मे फैल गया| हवन और धुंआ से कोरोना को भगाने का काम चल रहा है | भ्रम फैलाया जा रहा है कि यह 5जी और पूर्व जन्म के कर्मो का फल लोगों को मिल रहा है तो कहीं इसे दैवी प्रकोप बताया जा रहा है| लगातार विज्ञान की सत्यता को नकारा जा रहा था | गिलोय और कोरोनिल से इलाज बताया| कोई निम्बू के रस से इलाज बताना शुरू कर दिया|आपदा में अवसर तलाश करके कोरोनील खोज लिया जिसको देश के स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी उपस्थिति से वैद्यता दी| झूठ कह डाला कि विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणिकता मिल चुकी है| हर कदम पर धर्मान्धता को बढ़ावा दिया गया| यह बड़ा कारण बना की 1 साल का समय मिला लेकिन तैयारी नही की गई है| हजारों वर्ष से पाखंडी समाज में तो बहुत बदलाव नहीं हो सकता लेकिन सरकार तैयारी ना करे यह जरुर बहुत त्रासदी वाला कार्य था| भारत में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन और वैक्सीन का उत्पादन हो और ऐसे में दोनों का अभाव होना भयंकर विफलता है| जो समाज तर्कसंगत और वैज्ञानिक सोच का है वहां की सरकारों पर अंकुश लगा| अमेरिका , ब्रिटेन इत्यादि देशों ने पिछले जून-जुलाई में भारी निवेश करके पर्याप्त टीका का प्रबंध कर लिया |२८ जनवरी २०२१ को दावोस में हो रहे विश्व आर्थिक मंच पर प्रधानमंत्री जी ने एक तरह से कोरोना पर विजय की घोषणा कर दी| देश के स्वास्थ्य मंत्री ने मार्च में कह डाला कि अब तो कोरोना का खेल ख़त्म होने वाला है| संसदीय समिति ने नवम्बर २०२० में ही चेतावनी दे दी थी और वैज्ञानिकों ने फरवरी मार्च में खतरे का आगाह किया था लेकिन कोई संज्ञान नही लिया गया।

सरकार के ऊपर अंकुश विपक्ष और मीडिया का होता है|मीडिया दो कदम बढ़कर कमियों को छुपाने का काम करती रही| विज्ञानवादी देश जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प लगभग रोज मीडिया से मुखातिब होते थे और सरकार की योजनाओं और अग्रिम कदम को जनता के समक्ष रखते थे| ट्रम्प का मीडिया खाल उधेड़ देती थी | झूठ या नाकामी पर नंगा कर देती थी|अगर यहाँ कि मीडिया ने अपना कर्तव्य निभाया होता तो देश की बर्बादी इस कदर न हुई होती| विपक्ष से सवाल पूछती रही.विपक्ष इसलिए कमजोर पड़ा क्योंकि उसको जनतांत्रिक माहौल में राजनीति करने की आदत थी | लगभग सभी नेताओं के खिलाफ इनकम टैक्स , सी बी आई और ईडी लगा दी गयी है| अदालत का बचाव भी नहीं रहा|

धर्मांध समाज अपनी दुर्गति में भी तरक्की देखता है | हर हाल में भक्त खुश होते रहे | मुसलमानों को ठिकाने लगाया जा रहा है| निजीकरण से निजात पा रहे हैं| पहली लहर में तो भक्त बच- बचा गए थे लेकिन दूसरी लहर में अच्छा खासा चपेट में आ गए| निजीकरण के पक्ष में खड़े भक्तों का पैसा भी काम न आया क्योंकि न अस्पताल में बेड मिला न ही ऑक्सीजन | किसी भी आदमी को फोन करके पूछा जाए शायद ही कोई मिलेगा जो ये न कहे कि उसके परिवर के सदस्य, रिश्तेदार या दोस्तों कि मौत न हुयी हो| केंद्र,उत्तरप्रदेश और बिहार में हिन्दूवादियों की सरकार होते हुए हिन्दुओं को अंतिम संस्कार भी हिन्दू- रीति रिवाज से नसीब हो सका | लाशें गंगा में बहने लगी जब उस पर पहरेदारी हुई तो रेत और मिट्टी में दफनाया जाने लगा| ऐसी सरकार जो अपने हिन्दुओं को लकड़ी और कफ़न भी न दे सकी | खूब भूखे मरे, बेरोजगारी बढ़ी, उद्योग-व्यापार पूरी तरह से चौपट| आखिरकार यह नुकसान किसका हुआ. हिन्दुओं का ही हुआ. सरकार इतना तक इन्साफ न कर सकी कि हिन्दुओं कि लाशों की गिनती हो सके| कहीं दस गुना , कहीं बीस गुना तक लाशों की संख्या छुपाई गई ताकि छवि न खराब हो|

अंधविश्वासी,कुतर्की और साम्प्रदायिक समाज इस त्रासदी से कुछ सीख पायेगा इस पर अभी भी प्रश्नचिन्ह है| अब यह अभियान चलेगा कि यह तो भगवान की मर्ज़ी थी कोई क्या कर सकता है? मोहन भागवत बोल चुके हैं कि जो मरे उनको मुक्ति मिल गयी |हमारे अन्दर यह कूट- कूट कर भरा गया है कि वर्तमान अतीत की नींव पर है और प्रयास करो कि अगले जीवन में स्वर्ग मिले| इस तरह से समाज मानसिक रूप से पंगु बना दिया गया है| यह एक बड़ा कारण है, आम जनता अपने अधिकार को लेकर के सड़क पर नहीं उतरती| दुसरे देशों में अत्याचार बढ़ता है तो जनता सड़क पर आ जाती है| अमेरिका में जार्ज फ्लायड कि ह्त्या का मामला डेमोक्रेट ने नहीं उठाया बल्कि जनता सड़क पर आ गयी| दुनिया में ऐसे तमाम देश हैं जैसे तुर्की, ट्युनिसिया, बर्मा , अज़रबैजान और मिश्र जहाँ अन्याय के खिलाफ लोग सड़क पर आ जाते हैं| गलती न मानने वाले समाज मे सुधार की गुंजाइश नही होती|वर्तमान परिस्थिति को देखकर कहा जा सकता है कि भारत का कोई भविष्य नहीं है|

कार्ल मार्क्स ने सही कहा था कि धर्म जनता के लिए अफीम है। बर्बादी की शुरुआत २०१४ से हो गया था लेकिन हिन्दू- मुस्लिम और हिन्दू राज की नशा में लोगों को दिखा नही। जिसने देखा और टोका देश द्रोही कहा गया। बांग्लादेश से ही हम पीछे हो गए फिर भी कुछ लोगों की आंख नही खुल रही है। अस्पताल में कोरोना के इलाज के बाद बहुत लोग प्रसाद चढ़ाएंगे और तीर्थ भी करने की तैयारी में होंगे। जो आर्थिक रूप से सशक्त हैं अब भारत छोड़ रहे हैं।

( लेखक पूर्व लोकसभा सदस्य एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता है )