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मायावती को दलित की ही तरक्की से क्यों नफरत ? मायावती से उदित राज के 12 सवाल

डॉ उदित राज ,कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता, ने कुछ सवाल सुश्री मायावती से किये हैं।

1- जब भी कोई दलित तरक़्क़ी करता है या उच्च पद पर पहुचता है तो मायावती जी को सबसे ज्यादा कष्ट क्यों होता है ? श्री चरनजीत सिंह चन्नी जब पंजाब के मुख्यमंत्री बने तो कहा की कांग्रेस दिखावा कर रही है। जब श्री बंगारू लक्ष्मण बीजेपी के अध्यक्ष बने तो इतना गिर गईं की यह तक कह डाला की वो सफाई करने वाले जाती से हैं। श्री रामविलास पासवान को दुसाध जाति का कह डाला था। इतना नफरत तो मनुवादी मानसिकता वाले नही करते।

2- हमेशा झूठ बोला कि कांग्रेस ने डॉ अंबेडकर का अपमान किया। मायावती जी ने बाबा साहेब को जितना अपमान किया उतना कोई दूसरा नही कर सकता। बाबा साहेब जातिविहीन समाज का निर्माण करना चाहते थे और इन्होंने जातिवाद किया और भिन्न जातियों का सम्मेलन करके बढ़ावा दिया।बाबा साहेब का वैचारिक मतभेद कांग्रेस से कुछ बिंदुओं पर था लेकिन उसे अपमान के रूप में पेश करने का मतलब की डर है कि कहीं दलित फिर से कांग्रेस में न लौट जाएं।

3- मायावती ने बसपा में एक दलित को नेता के रूप में पनपने नही दिया । कांग्रेस ने कई प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के दलित नेता पैदा किये।

4-झूठ है की बाबासाहेब को संसद में कांग्रेस पहुचने से रोका। आज़ादी के पहले पूर्वी बंग्लादेश से जरूर संसद में चुनकर आये लेकिन देश बटवारे के बाद कांग्रेस अपने नेता का स्तीफा कराके डॉ अंबेडकर को संविधान सभा मे चुनवा कर भेजा। मंत्री बनाया और संविधान मसौदा समिति का चेयरमैन ।

5-यह कहना कि डॉ अम्बेडकर को कांग्रेस ने 1952 में लोक सभा का चुनाव नही जितने दिया। क्या कोई पार्टी चुनाव हारने के लिए कोई लड़ती है? बाबा साहेब चुनाव कम्युनिस्ट नेता एस ए डांगे से हारे थे न कि कांग्रेस से ।

6-नेहरू जी की सोशलिस्टिक अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोड़ न होता तो संविधान होते हुए भी दलित -आदिवासी का कल्याण नही हो सकता था। इसी सोच कर कारण निजी क्ष्रेत्र का राष्ट्रीयकरण कांग्रेस ने किया जैसे एयर इंडिया , जीवन बीमा , बैंक, कोयला , तेल आदि । राष्ट्रीयकरण ही नही किया बल्कि सरकारी विभाग , शिक्षण संस्थाएं व सार्वजनिक उद्योग खड़े किए जिसके वजह से नौकरियां मिलीं। जो लोग संविधान के नाम पर चिल्ला चिल्ली करते हैं कि कौन हमारे अधिकार को छीन सकता है जब तक बाबा साहेब का संविधान है , उनकी गलत फहमी दूर ही जानी चाहिए की संविधान को बिना बदले मोदी जी ने लगभग सारी नौकरियां खत्म कर दी। सारे अधिकार 1990 के पहले के हैं जिसका लाभ दलित-आदिवासी अभी तक उठा रहे हैं और सब कुछ कांग्रेस ने ही लागू किया।

7-भूमिहीनों को भूमि, स्पेशल कॉम्पोनेन्ट प्लान , आरक्षण लागू करना, दलित कानून, बिना फीस शिक्षा, कोटा कांग्रेस ने दिया । मायावती ने एक काम किया तो गिना दें केवल पार्क बनवाने के ।

8-ब्राह्मण मनुवादी थे तो क्या अब नही रहे ? सतीश मिश्र जी के मुकाबले में एक भी दलित पार्टी में नेता नही है और न हो पायेगा।

9- दलित कल्याण के जगह परिवार का किया । सारी जमीन व धन उन्ही के पास है।

10-जिन दलितों ने सब कुछ खोकर पार्टी बढ़ाने का कार्य किया , उनसे भी टिकट के लिए पैसे मांगे। इतना क्रूर बर्ताव शायद ही कोइ पार्टी करती है।

11-गए संसद सत्र में किसान समस्या , महगाई, निजीकरण जैसे मुद्दे पर विपक्ष के साथ न खड़े होने का मतलब बीजेपी के साथ होना।

12- राम लहर में बीजेपी उप्र में चुनाव हार गई और उसके बाद मजबूत होती गई। बसपा ने बीजेपी के साथ 3 बार उप्र में सरकार बनाई और परिणाम की बीजेपी और मजबूत हुई।

सुश्री मायावती को धन और सत्ता से मतलब है न कि दलित उत्थान से। किसी अधिकार या मुद्दे पर कभी संघर्ष नही किया बस केवल चंद व वोट चाहिए ।